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हरदोई का इतिहास, ‘हरदोई बाबा’ का चौंकाने वाला इतिहास, क्यों इतिहास के पन्नो में है हरदोई का नाम

हरदोई का इतिहास  हरदोई का इतिहास, ‘हरदोई बाबा’ का चौंकाने वाला इतिहास, क्यों इतिहास के पन्नो में है हरदोई का नाम आज भी मशहूर है चाहे वो राजाओं से जुडी कहानियों के लिए हो या किसी धर्मकी स्थल के रूम में हरदोई में भक्त प्रहलाद जैसे भगवान् के भक्त भी हुए और भगवान् का विरोध करने वाले हिरणाकश्यप जैसे पापी भी हुए। हरदोई का इतिहास बहुत पुराना है हरदोई का उल्लेख कई बड़ी पवित्र ग्रंथों में भी किया गया है। आज हम आपके साथ एक ऐसा रहस्य साझा करेंगे जिसके बारे में शायद आप ने कभी न सुना हो।

हरदोई का इतिहास

बात उस वक्त की है जब भारत पर ब्रिटिश हुकूमत का राज था। भारत में कई सूरवीर हुए जिन्होंने ब्रिटिश हुकूमत के साथ डट कर खड़े रहे जिसमें स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के अलावा भी देश की कुछ रहस्यमई शक्तियों ने भी अंग्रेजों के सामने लोहा मनवाया था. हरदोई में भी अंग्रेजी शासन काल से भी पहले के संत श्री हरदोई बाबा का नाम बड़े आदर और सम्मान के साथ में लिया जाता है. हरदोई में कोई भी धार्मिक आयोजन और संस्कार हरदोई बाबा के मंदिर में जाए बिना नहीं होता है. चाहे किसी की शादी हो या कोई भी बड़ा राजनेता. हरदोई में पदार्पण के बाद बाबा के दरबार में जाना नहीं भूलता है.

बाबा के किस्से आजादी की लड़ाई से लेकर अभी भी कई रहस्यों को अपने आप में समेटे हैं. उत्तर प्रदेश की राजनीति में हरदोई का अपना एक अलग रसूख है. यहां आठ विधायक, दो सांसद हैं. वहीं हरदोई बाबा के दर्शन करने वाले राजनेताओं की लिस्ट भी काफी लंबी है. मंदिर का संचालन कर रहे जितेश दीक्षित ने बताया कि अंग्रेजी हुकूमत में हरदोई जिले में जिला जेल के अंदर फांसी की सजा सुनाई जाती थी. किसी निर्दोष ने बाबा से आकर उसे फांसी दिए जाने की शिकायत की थी. जिस पर बाबा क्रोधित हो गए थे.

हरदोई का इतिहास जिसमें हरदोई जेल में नहीं दी जाती फांसी

बाबा के मना करने के बावजूद भी अंग्रेजों ने उस व्यक्ति को फांसी दे दी थी. तख्त पलटने के साथ फांसी दिए गए व्यक्ति की मृत्यु नहीं हुई थी. बताया जाता है कि स्वप्न में आकर बाबा ने अंग्रेज जेलर से फांसी के तख्त को हरदोई से कहीं और ले जाने का आदेश दिया था. स्वप्न से डरे अंग्रेज जेलर ने फांसी के तख्त को हरदोई से हटाकर फतेहगढ़ भेज दिया था. तब से लेकर के आज तक हरदोई जेल में फांसी की सजा नहीं दी जाती है.

करीब 400 वर्ष पुराना है मंदिर

अदालत के द्वारा सुनाई गई फांसी की सजा आज भी सेंट्रल जेल फतेहगढ़ में दी जाती है. हरदोई जिला जेल अधीक्षक बृजेश सिंह ने बताया कि फांसी की सजा हरदोई में सुनाई तो जरूर जाती है, लेकिन यह फांसी फतेहगढ़ जेल में दी जाती है. मंदिर के पुजारी और संचालक प्रीतेश दीक्षित ने बताया कि उनके बाबा पंडित राम नारायण दीक्षित बताते थे कि यह मंदिर करीब 400 वर्ष पुराना है. अंग्रेजी हुकूमत से भी पहले यहां पर एक विशालकाय जंगल हुआ करता था.

अपनी समस्या बताकर आशीर्वाद लेते हैं लोग

जंगल में एक बूढ़े बाबा नाम से संत कुटी बनाकर समाधि अवस्था में तपस्या किया करते थे. आसपास के लोग किसी समस्या को लेकर बाबा के पास अक्सर जाया आया करते थे. संत बूढ़े बाबा ने हवन कुंड वाली जगह पर ही जीवित समाधि ले ली थी और उसी स्थान पर एक पत्थर की मूर्ति भी प्राप्त हुई थी. बाबा की समाधि लेने के काफी वर्षों के बाद वहां पर लोगों का आना-जाना जारी रहा. लोग वहां पर जाकर अपनी समस्या को बताकर आशीर्वाद प्राप्त किया करते थे. धीरे-धीरे उस स्थान के विकास करने के बाद मंदिर के भव्य रूप में इसे परिलक्षित किया गया.

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हवन की आग प्राचीन काल से जलती आ रही

मंदिर के प्रमुख पुजारी कृष्ण अवतार दीक्षित ने बताया कि जनपद में हिंदुओं के अलावा मुस्लिम भी किसी अच्छे काम को करने के बाद इस मंदिर पर प्रसाद चढ़ाने के लिए अवश्य आते हैं. शादी होने के बाद बहू घर तभी जाती है, जब वह मंदिर में दर्शन कर लेती है. जनपद के ज्यादातर संस्कार मंदिर के संरक्षण में ही होते हैं. यह रहस्यमई मंदिर समय-समय पर अपने प्रभाव को दर्शाता रहता है. कोरोना काल में मंदिर में नियम और संयम के साथ पूजा-अर्चना का दौर जारी रहा था. बुजुर्गों का कहना है कि हरदोई बाबा के मंदिर में धूनी कभी ठंडी नहीं होती है. हवन की आग प्राचीन काल से जलती चली आ रही है.

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