Maunda Ramleela Mahotsav: 90 वर्षों से पूरे लखनऊ में ख्याति प्राप्त मौंदा गांव की मैदानी रामलीला इस बार 1 अक्टूबर से काफी जोरदार ढंग से प्रदर्शित किए जाने की तैयारियां शुरू

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Maunda Ramleela Mahotsav: लखनऊ में ख्याति प्राप्त मोहान रोड स्थित मौंदा गांव की मैदानी रामलीला इस बार काफी जोरदार ढंग से प्रदर्शित किए जाने की तैयारियां शुरू हो गई है दि मौदा ड्रामेटिक क्लब (The Mouda Dramatic Club) की ओर से रामलीला महोत्सव के कार्यक्रमों को घोषित कर दिया गया है हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी राम की लीलाओं का प्रदर्शन किया जाएगा इसके अलावा रावण वध 5 अक्टूबर को मैदान में दर्शाया जाएगा।

2021 में मनाए गए महोत्सव की कुछ तस्वीरें 

यहां रामलीला समिति कार्यालय दि मौदा ड्रामेटिक क्लब द्वारा बताया गया की हर वर्ष की तरह इस बार भी राम लीला महोत्सव की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं।

यह जानकारी देते हुए आयोजकों ने आगे बताया इस बार अन्य परंपरागत कार्यक्रमों के साथ-साथ बनवासी राम की कुटिया पंचवटी तथा रावण का दरबार विशेष रूप से दर्शनीय होंगे। यहां पंचक लग्न में रावण वध होने की परंपरा के कारण 5 अक्टूबर 2022 को पंचक लग्न में रावण का वध देर शाम दर्शाया जाएगा।

॥ संपूर्ण कार्यक्रम जानकारी ॥

01-10-22- शनिवार रात्रि 10 बजे धनुष यज्ञ (दि मौदा ड्रामेटिक क्लब द्वारा) 02-10-22- रविवार सायं 4 बजे से बारात श्री रामचन्द्र जी 8 बजे रात्रि से रामवन गमन

रात्रि 10 बजे से (दि मौदा ड्रामेटिक क्लब द्वारा) अंधी दुनिया, औरत औरत की दुश्मन 03-10-22 सोमवार रात्रि 8 बजे से सीताहरण, रात्रि 10 बजे से रहस व संगीत अकील म्यूजिक पार्टी चाँदन पिकनिक स्पाट रोड, लखनऊ द्वारा

04-10-22- मंगलवार रात्रि 8 बजे से बालिवध व लंका दहन

रात्रि 10 बजे से रहस व संगीत अकील म्यूजिक पार्टी चाँदन पिकनिक स्पाट रोड़ लखनऊ 05-10-22- बुधवार सायं 6 बजे से रावण वध रात्रि 10 बजे से रहस व संगीत

6-10-22- गुरुवार रात्रि 8 बजे से भरत मिलाप व राजतिलक, रात्रि 10 बजे से रहस व संगीत

स्थान : मोहन रोड स्थित टीएस मिश्रा रोड ग्राम व पोस्ट-मौंदा, लखनऊ

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MP Project Cheetah Live: 11 घंटे की यात्रा करके विमान चीतों को लेकर ग्वालियर पहुंचा

MP Project Cheetah Live: भारत में चीतों का इंतजार खत्म हो चुका है। करीब 11 घंटे का सफर करने के बाद चीते भारत पहुंच चुके हैं। आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इन्हें बाड़े में छोड़ेंगे।

चीतों को भारत की सरजमीं पर उतारा गया। – फोटो : सोशल मीडिया

बता दें कि पांच मादा और तीन नर चीतों को लेकर विमान ने नामीबिया से उड़ान भरी थी। नामीबिया से भारत लाने के लिए विमान में विशेष माप वाले पिंजरे बनाए गए थे। करीब 11 घंटे की यात्रा करके ये चीते शनिवार सुबह ग्वालियर में उतरे। ग्वालियर से इन्हें विशेष चिनूक हेलीकॉप्टर से मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क लाने की कवायद की जा रही है।

प्रधानमंत्री कूनो पहुंचेंगे। – फोटो : सोशल मीडिया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मध्य प्रदेश के लिए रवाना हुए, जहां दो बड़े कार्यक्रम होंगे। एक ऐतिहासिक अवसर पर आज सुबह नामीबिया से आए 8 चीतों को कुनो नेशनल पार्क में छोड़ा जाएगा। पीएम श्योपुर में स्वयं सहायता समूहों के एक कार्यक्रम में भी शामिल होंगे। ग्वालियर एयरबेस पहुंचने के बाद वे कूनो अभायरण्य के लिए रवाना हो जाएंगे। बताया जा रहा है कि पीएम मोदी कुछ देर बाद यानी 9:40 बजे एयरवेज पर आएंगे और 9:45 पर कूनो अभायरण्य के लिए रवाना हो जाएंगे।  जिला प्रशासन के अधिकारियों के साथ-साथ उनकी अगवानी करने के लिए गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा भी पहुंच गए हैं।

सिंधिया ने कहा कि देश के लिए ही नहीं बल्कि विश्व के लिए बहुत बड़ी सौगात दी जा रही है। – फोटो : सोशल मीडिया

ग्वालियर पहुंचे केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि देश के लिए ही नहीं बल्कि विश्व के लिए बहुत बड़ी सौगात दी जा रही है। विश्व में पहली बार चीतों का विस्थापन हो रहा है। देश की धरती पर ऐसे आविष्कार किए जा रहे हैं जो  विश्व में कही नहीं रहा और ऐसा ही उदाहरण कूनो पालपुर है। कल से पूरे देश भर में चीतों की दहाड़ इस ग्वालियर चंबल अंचल से निकलेगी। यूरोप और एशिया में कोई और जगह नहीं है जहां चीतों की स्थापना हुई है केवल भारत में मध्य प्रदेश के अंदर कूनो में स्थापना होगी। मध्य प्रदेश के कुनो पालपुर के जंगल, नामीबिया से लाए गए चीतों के स्वागत के लिए तैयार है। प्रधानमंत्री जी द्वारा अपने जन्मदिन पर छोड़े जा रहे ये चीते, मध्य प्रदेश के लिए उपहार हैं जो यहां के वन्यजीवन को और समृद्ध करेंगे तथा पर्यटन और समृद्धि के नए द्वार खोलेंगे। केंद्रीय मंत्री ज्याेतिरादित्य सिंधिया ने कहा-एक नई गूंज, एक नई दहाड़, एक नई गरज कूनाे पालपुर से हमें सुनाई देगी, इस बार चीताें की, देश में ये एक अनाेखा क्षेत्र हाेगा, अनाेखा स्थान हाेगा।

कूनो नेशनल पार्क में आवाजाही तेज हो गई है। टिकटोली गेट से 18 किलोमीटर अंदर प्रोग्राम होगा। फ्लाइट लेट होने की वजह से यहां ग्वालियर से 10 बजे के बाद चीतों के आने की संभावना है। केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और वन मंत्री विजय शाह कूनो पहुंच चुके हैं।

सीएम शिवराज ने चीतों को वरदान बताया। – फोटो : सोशल मीडिया

मुख्य़मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि आदरणीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के जन्मदिन पर मध्यप्रदेश को इससे बड़ी सौगात हो नहीं मिल सकती कि चीते नामीबिया से भारत, भारत में भी मध्यप्रदेश, मध्यप्रदेश में भी कूनो पालपुर आ रहे हैं। भारत में चीते समाप्त हो गए थे। चीता पुनर्स्थापना का ऐतिहासिक काम हो रहा है। इस सदी की वाइल्डलाइफ की सबसे बड़ी घटना है। इससे मध्य प्रदेश में, बल्कि उस अंचल में टूरिज्म बहुत तेजी से बढ़ेगा। उस क्षेत्र के लिए तो चीता वरदान हो गया।

यह है प्रधानमंत्री का मिनट टू मिनट कार्यक्रम

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी ग्वालियर एयरबेस पर 9:40 पर पहुंचेंगे और 9:45 पर पीएम मोदी सेना के हेलीकॉप्टर से कूनो अभयारण्य के लिए रवाना होंगे। इसको लेकर महाराष्ट्र एयरवेज पर हाई सिक्योरिट का इंतजाम किया गया है। एसपीजी सहित तमाम पुलिस फोर्स मौजूद रहेगा। प्रधानमंत्री अपने जन्मदिन पर कूनो में चीतों को छोड़ेंगे।

  • 9:40 पर सुबह विशेष विमान से ग्वालियर आगमन होगा।
  • 9:45 बजे हेलीकॉप्टर से कूनो नेशनल पार्क के लिए रवाना होंगे।
  • 10:45 से 11:15 बजे चीतों को बाड़े में छोड़ेंगे।
  • 11:30 बजे हेलीकॉप्टर से करहाल रवाना होंगे।
  • 11:50 बजे करहाल पहुंचेंगे।
  • 12:00 से 1:00 बजे तक महिला स्व सहायता समूह सम्मेलन में शामिल होंगे।
  • 1:15 बजे तक करहाल से हेलीकॉप्टर से ग्वालियर रवाना होंगे।
  • 2:15 बजे ग्वालियर एयरपोर्ट पहुंचेंगे।
  • 2:20 बजे दोपहर को ग्वालियर से रवाना होंगे।

नामीबिया से चीतों को इस विशेष विमान से लाया गया। – फोटो : ANI

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि हम बाघ वाले राज्य थे। अब तेंदुआ और चीता वाले राज्य बन रहे हैं। हमने 20 साल पहले गांवों को हटाकर कूनो को तैयार किया था, ताकि जंगली जीव बढ़ सकें और ग्रामीण सुरक्षित रहें। सपने अब सच हो रहे हैं। इस दशक में वन्यजीवों के लिए यह सबसे बड़ा अवसर होगा।

1948 में आखिरी बार देखा गया था चीता 
भारत में आखिरी बार चीता 1948 में देखा गया था। इसी वर्ष कोरिया राजा रामनुज सिंहदेव ने तीन चीतों का शिकार किया था। इसके बाद भारत में चीतों को नहीं देखा गया। इसके बाद 1952 में भारत में चीता प्रजाति की भारत में समाप्ति मानी गई। कूनो नेशनल पार्क में चीते को बसाने के लिए 25 गांवों के ग्रामीणों और 5 तेंदुए को अपना ‘घर’ छोड़ना पड़ा है. इन 25 में से 24  गांव के ग्रामीणों को दूसरी जगह बसाया जा चुका है।

1970 में एशियन चीते लाने की हुई कोशिश
भारत सरकार ने 1970 में एशियन चीतों को ईरान से लाने का प्रयास किया गया था। इसके लिए ईरान की सरकार से बातचीत भी की गई, लेकिन यह पहल सफल नहीं हो सकी। केंद्र सरकार की वर्तमान योजना के अनुसार पांच साल में 50 चीते लाए जाएंगे।

चीतों को लेकर पहुंचा विमान ग्वालियर में उतरा। – फोटो : ANI

नामीबिया से चीतों को लेकर आ रही स्पेशल फ्लाइट लेट ग्वालियर पहुंच चुकी है। पहले इसके पहुंचने का समय सुबह 6 बजे माना जा रहा था, पर कुछ देरी से 7 बजकर 55 मिनट पर पहुंचा।

24 घंटे की जाएगी चीतों की निगरानी 
वन विभाग के अधिकारी ने बताया कि बाड़े आसपास मचान बनाए गए हैं। यहां पर रोस्टर के हिसाब से ड्यूटी लगाई जाएगी। जो 24 घंटे चीतों की मॉनीटरिंग करेंगे। इसमें फारेस्ट गार्डन, रेंज अफसर, वेटनरी डॉक्टर की अलग-अलग ड्यूटी है। वेटनरी डॉक्टर उसकी हेल्थ को देखेगा। चीतों नॉर्मल खाना-खा रहा है या नहीं। उनकी डेली रूटिन को बीट गार्ड देखते रहेंगे। चौहान ने बताया कि शिकारियों से बचाने के लिए 8-10 वर्ग किमी पर एक पेट्रोलिंग कैम्प है। जिसमें गार्ड और उनके सहायक रहते हैं। इसके अलावा एक्स आर्मी के जवानों को भी लिया हुआ है। ताकि अवैध गतिविधियों को रोका जा सके।

MP Project Cheetah Live: चीतों को नामीबिया से लाया विमान भारत में लैंड, PM मोदी कूनो नेशनल पार्क में छोड़ेंगे

MP Project Cheetah Live, PM Modi News in Hindi : आज भारत के लिए महत्वपूर्ण दिन है। जिन चीतों का बेसब्री से इंतजार किया जा रहा था, वे नामीबिया से ग्वालियर पहुंच चुके हैं। नामीबिया से करीब 11 घंटे इंतजार के बाद इनका सफर खत्म हुई है। शनिवार सुबह करीब 8 बजे पर इन्हें प्लेन से उतारा गया। 24 लोगों की टीम के साथ चीते ग्वालियर के महाराजपुरा एयरबेस पर उतरे। यहां चीतों का रुटीन चेकअप किया जाएगा। इसके बाद हेलीकॉप्टर द्वारा चीतों को कूनो नेशनल पार्क लाया जाएगा। कूनो पहुंचने में करीब आधे घंटे का वक्त लगेगा।

प्रधानमंत्री मोदी करीब 11 बजे 3 चीतों को बाड़े में छोड़ेंगे। इनमें दो नर और एक मादा चीता है। नर दोनों चीतें सगे भाई हैं। वन विभाग के अधिकारी जेएस चौहान ने बताया कि ग्वालियर से हेलीकॉप्टर से लाने के बाद चीतों को छोटे-छोटे क्वारंटीन इनक्लोजर में लेकर जाया जाएगा। प्रधानमंत्री तीन चीतों को छोड़ेंगे। इसके बाद बाकी के चीतों को बाड़े में छोड़ा जाएगा। एक महीने क्वारंटीन के बाद बड़े बाढ़े में छोड़ा जाएगा। यहां दो से तीन महीने रखने के बाद उनको जंगल में छोड़ दिया जाएगा। पालपुर में एक छोटा वेटनरी अस्पताल होगा। जहां तीन वेटनरी डॉक्टर उनके स्वास्थ्य की देखभाल के लिए मौजूद रहेंगे।

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Police Raid in OYO: ओयो होटल में आपत्तिजनक हालत में मिले कई जोड़े, एसडीएम व सीओ द्वारा पुलिस टीम के साथ बड़ौत में कई ओयो होटल में की छापेमारी

Police Raid in OYO: उत्तर प्रदेश के बड़ौत में जगह-जगह संचालित ओयो होटल में जमकर अनैतिक कार्य हो रहे हैं। इसका खुलासा गुरुवार को एसडीएम व सीओ द्वारा पुलिस टीम के साथ कोताना रोड पर स्थित ओयो होटल अन्य जगहों पर की गई छापेमारी के बाद हुआ है। इस दौरान टीम ने कई जोड़ों को भी पकडा, उनके आधार कार्ड सहित अन्य कागजात भी देखे। इस दौरान प्रशासन अनुमति बगैर होटल संचालित किए जाने पर अधिकारियों ने  नाराजगी जताते हुए होटल संचालकों को लताड़ लगाई और उसके रजिस्टर सहित अन्य कागजात जब्त कर लिए।
बता दें कि बुधवार को भी ओयो होटल (OYO Hotel) संचालकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग को लेकर हंगामा भी किया गया था। लोगों का कहना था कि यहां अनैतिक कार्य हो रहे हैं, इन होटलों को तत्काल बंद कराया जाना चाहिए। मामला बढ़ता देख पुलिस टीम खानापूर्ति कर चली गई थी। इसको लेकर भी लोगों ने नाराजगी जताई थी।

जानकारी के अनुसार नगर में कई दिन से ओयो होटलों के खिलाफ हो रहे हंगामे को देखते हुए गुरुवार को सीओ युवराज सिंह और एसडीएम सुभाष सिंह ने पुलिस टीम के साथ कई ओयो होटलों का निरीक्षण किया। एक होटल में अफरा-तफरी मच गई। यहां पर पुलिस टीम ने कई जोड़ों को एक साथ पकड़ा। जिसके बाद महिला कांस्टेबल को भी मौके पर बुलाया गया। उधर, संचालक लाइसेंस नहीं दिखा सका। लोगों ने पुलिस-प्रशासन से होटलों को बंद कराने की मांग की है।

ताला लगाकर भागे संचालक
सीओ और एसडीएम पुलिस टीम लेकर सीएसची के पास पहुंचे तो यहां स्थित ओयो होटल में युवक और युवती मिले। पुलिस को देखते ही होटल में अफरा-तफरी मच गई। पुलिस ने होटल खाेलने के लिए लाइेसेंस आदि अभिलेख देखने चाहे, जो संचालक नहीं दिखा सका। दूसरे कमरे का दरवाजा नहीं खोला गया। पुलिस ने वहां रखे कई रजिस्टर जब्त कर लिए।

उसके बाद पुलिस कोताना रोड पर पूर्वी यमुना नहर पर ओयो होटल पर पहुंची, लेकिन पहले ही सूचना मिलने पर संचालक होटल पर ताला लगाकर भाग खड़ा हुआ। पुलिस ने होटल के आसपास लोगों से जानकारी हासिल की। पुलिस ने सीएचसी के पास ही नमन पैलेस होटल में भी चेकिंग की। उसके बाद वापस लौट गई।

लोगों ने किया हंगामा
पुलिस के जाते ही कोताना रोड पर लोग एकत्र हो गए ओर होटल खुलने के विरोध में हंगामा करते हुए कहा कि होटल खुलने से माहौल खराब हो रहा है। स्कूल ड्रेस में छात्र हाेटलों में जा रहे हैं। होटल संचालकों से मांग की गई है कि वह स्कूल ड्रेस में किसी भी छात्र को होटल में प्रवेश न दें। लोगों ने पुलिस-प्रशासन से होटलों को बंद कराने की मांग की है। सीओ युवराज सिंह ने बताया कि ओयो होटलों के खिलाफ एसपी के निर्देश पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इसी के तहत संचालकों से लाइसेंस आदि दिखाने के लिए कहा है, जो वे नहीं दिखा सके। संचालकों से लाइसेंस दिखाने को कहा गया है।

Lakhimpur Kheri case: पीड़िता के गांव की लड़कियां आरोपियों के गांव के शोहदे व अन्य से परेशान हैं

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Lakhimpur Kheri case: लखीमपुर खीरी के निघासन में मृतक दो बहनों की मां ने जहां गांव के ही पड़ोसी छोटू को मुख्य साजिशकर्ता बताते हुए उसकी मामले में संलिप्तता बताई है तो वहीं छोटू को लेकर गांव में दो फाड़ हैं। मृतका के पड़ोस वाले लोग छोटू को तो आरोपी, लेकिन छोटू के पड़ोसी मृतका के परिवार को दोषी बता रहे हैं। वहीं पीड़िता के गांव की लड़कियों ने दबी जुबान में बताया कि आरोपियों के गांव के शोहदे व अन्य ने स्कूल जाने वाली लड़कियों का जीना मुहाल कर रखा है।

lakhimpur kheri case
lakhimpur kheri case – फोटो : अमर उजाला

लखीमपुर खीरी कांड में पकड़े गए आरोपी
उधर, दबी जबान में गांव की लड़कियों ने बताया कि वह जिला पंचायत इंटर कॉलेज में पढ़ती हैं। जब वह स्कूल जाती हैं तो आरोपियों के गांव से निघासन के लिए निकलते हुए वहां के लोग अभद्रता करते हैं, लेकिन डर के मारे वह कुछ नहीं बोलती हैं। हालांकि, बच्चियों ने पांचों आरोपियों को पहचानने से इनकार कर दिया। उधर, एक गांव से गिरफ्तार पांचों आरोपियों जुनैद, सुहेल, हफीजुर्रहमान उर्फ मंझिलका, करीमुद्दीन और आरिफ के परिजनों का कहना है कि यह सभी युवक बाहर मजदूरी करने जाते थे। दो सितंबर को बिसवां मेले के लिए हैदराबाद से आए थे। उन पर कभी चारित्रिक दोष नहीं लगा।

दो बहनों के साथ बलात्कार: पहले भेड़ियों की तरह नोचा फिर मार कर पेड़ से लटकाया, तीन आरोपी दूसरे समुदाय के हैं।

दो बहनों के साथ बलात्कार: लखीमपुर खीरी (Lakhimpur Kheri) जिले के निघासन थाना इलाके के एक गांव में बुधवार शाम करीब छह बजे अनुसूचित जाति की दो सगी बहनों के शव पेड़ से लटके मिले। मां का कहना है कि शाम करीब पांच बजे उनके सामने ही एक पड़ोसी और तीन अन्य दोनों बेटियों को अगवा कर ले गए थे। घटना से गुस्साए परिजनों ने ग्रामीणों के साथ सदर चौराहे पर जाम लगा दिया। देर शाम आईजी लक्ष्मी सिंह ने आरोपियों पर कार्रवाई का आश्वासन दिया, तब जाकर जाम समाप्त हुआ। आशंका जताई जा रही है कि तीन आरोपी दूसरे समुदाय के हैं।
मां के मुताबिक दोनों नाबालिग बेटियां घर के बाहर लगी मशीन पर चारा काटने गईं थी। शाम करीब पांच बजे पड़ोसी गांव के तीन युवक बाइक पर सवार होकर आए और दोनों को जबरन बाइक पर बैठाकर भागने लगे। मां ने शोर मचाते हुए बाइक सवारों का पीछा किया, लेकिन वे उन्हें धक्का देकर भाग निकले। शोर सुनकर गांव वाले भी इकट्ठा हो गए और आरोपियों की तलाश शुरू की। करीब एक घंटे बाद गांव के ही एक व्यक्ति के खेत में उनका शव खैर के पेड़ से लटका मिला।
लखीमपुर के निघासन में एक बाइक पर तीन सवार आए। दोनों बहनों को खींचा। बेटियों को उनके चंगुल से छुड़ाने के लिए मां भिड़ी तो उसे धक्का दे दिया और भेड़ियों की तरह बाइक पर टांग ले गए। यह किस्सा मृत बेटियों की मां ने बताया।

ग्रामीणों से हुई पुलिस की नोकझोंक
ग्रामीणों से हुई पुलिस की नोकझोंक – फोटो : अमर उजाला

निघासन में मिले दो बहनों के शव
निघासन में मिले दो बहनों के शव – फोटो : अमर उजाला
मृतका की मां ने बताया कि शाम पांच बजे के करीब उनकी बड़ी बेटी (17) व छोटी बेटी (15) घर के बाहर लगी चारा मशीन पर जानवरों के लिए चारा काटने जा रही थी कि तभी सफेद बाइक पर सवार तीन युवक दोनों बेटियों को दबोचकर बाइक पर बैठा ले गए। बिटिया को बचाने की कोशिश में उसे भी चोटें आईं। मां के शोर मचाने पर इकट्ठा हुए ग्रामीणों ने तलाश शुरू की तो 48 मिनट बाद 5 बजकर 48 मिनट पर गांव से करीब 700 मीटर की दूरी पर गन्ने के खेत में लगे खैर के पेड़ में दुपट्टे से लटके दोनों के शव मिले।

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Bahraich News: प्रशासन की सुस्ती से नेपाल सीमा पर पांच साल में खुले डेढ़ सौ अवैध मदरसे

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Bahraich News: बहराइच जिले में नेपाल (Nepal) व भारत बार्डर (Bharat Border) के नो मेंस लैंड (men’s land) के आसपास मदरसों का जाल तेजी से फैलता जा रहा है। बीते पांच साल के दौरान प्रतिबंधित क्षेत्र में करीब डेढ़ सौ अवैध मदरसे संचालित होने लगे हैं। इनका पंजीकरण नहीं है। इसके साथ ही जिले के अन्य इलाकों में भी अवैैैध तौर से चल रहे मदरसों की संख्या कम होने का नाम नहीं ले रही। इसकी जानकारी के बाद भी रोकथाम की कार्रवाई को लेकर प्रशासन पूरी तरह उदासीन बना है।

सुरक्षा निगरानी में बरती जा रही शिथिलता के कारण इन मदरसों में नेपाल व भारत दोनों जगह रहने वाले बच्चे मजहबी तालीम पाने के नाम पर पढ़ते हैं। इतना ही नहीं कई मदरसों में जाने वाले बच्चों का नामांकन तो बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा संचालित परिषदीय स्कूलों तक में है। शासन के निर्देश पर अब जिले में शुरू हुए मदरसों के सर्वे कार्य के बाद जिले में संचालित ऐसे मदरसा संचालकों में हड़कंप है। हालांकि इसकी पूरी तस्वीर सर्वे रिपोर्ट के बाद ही साफ हो सकेगी।

 

जिले में रुपईडीहा कस्बे के पास से भारत- नेपाल सीमा शुरू होती है। यहां पर नो मेंस लैंड के आस-पास वाले इलाकों में रहने वाले विशेष समुदाय के बच्चों का प्राइमरी व जूनियर विद्यालयों में नामांकन तो देखा जाता है लेकिन इसका फायदा सिर्फ बच्चों के कल्याण के लिए संचालित सरकारी योजनाओं का फायदा पाने तक ही दिखता है। हकीकत में पंजीयन के बाद यह बच्चे पढ़ाई के लिए मदरसों में ही जाते हैं। इसी लिए प्राइमरी व जूनियर सरकारी विद्यालयों में ऐसे बच्चों के नामांकन के बावजूद उनकी उपस्थिति नहीं मिलती है।

 

सीमा क्षेत्र के निबिया, लहरपुरवा, रंजीतबोझा ,मिहींपुरवा ,पुरवा पचपकड़ी करीम गांव रुपईडीहा निधि नगर पोखरा, लखैया, सुजौली, अंटहवा, नई बाजार बाबागंज, आदि इलाके अवैध तौर से संचालित मदरसों के मकड़जाल में फंसे हैं। इन क्षेत्रों में करीब डेढ़ सौ मदरसों का संचालन हो रहा है जबकि पंजीयन महज दो दर्जन करीब मदरसों का ही है। इन मदरसों में मजहबी शिक्षा के साथ ही कुछ अन्य विषयों की शिक्षा भी दी जा रही है।

 

नो मेंस लैंड के प्रतिबंधित इलाकों में अवैध तरीके से संचालित मदरसों में सिर्फ मजहबी शिक्षा ही दी जाती है। यहां पर मदरसा जामिया कासमिया नसरूल उलूम में करीब 60 बच्चें और दो शिक्षक है। बताया गया कि मदरसा रजिस्टर्ड नहीं है। ग्राम रंजीतबोझा में चल रहे मदरसा के मौलवी हसमत अली ने बताया कि वह लखीमपुर के रहने वाले हैं और यहां आने वाले बच्चों को मजहबी शिक्षा देने के लिए आस पास के घरों से प्रति बच्चा सौ रुपया की धनराशि भी ली जाती है।

 

यह मदरसा पंजीकृत न होने के कारण इसका पूरा खर्च दान में जुटाए पैसों से ही चलता है। कादरी मस्जिद में भी बच्चों की पढ़ाई होती है लेकिन यह मदरसा भी रजिस्टर्ड नहीं है। ऐसे अपंजीकृत तमाम मदरसों में भरत के साथ ही नेपाल व पाकिस्तान मूल के बच्चे भी पढ़ते हैं। इससे यहां संचालित होने वाली संदिग्ध गतिविधियों से देेेश की आंतरिक सुरक्षा को भी खतरा बना रहता है।

 

क्षेत्रीय लोगों के अनुसार करीब पांच साल पहले नो मेंस लैंड के आस पास मात्र 15-20 मदरसा ही संचालित थे। लेकिन सुरक्षा निगरानी में ढील के चलते बीते पांच साल में इन अवैध मदरसों की संख्या का आंकड़ा करीब डेढ़ सौ तक पहुंच गया है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार जिले में कुल 301 पंजीकृत मदरसा है। इनमें से 180 सरकार से अनुदानित हैं। विभागीय अधिकारी भी नाम न उजागर करने पर मानते हैं कि नो मेंस लैंड व इसके आस पास बड़ी संख्या में अवैध मदरसों का संचालन हो रहा है।

 

जिले में मदरसों के सर्वे का काम शुरू किया गया है। अभी गैर मान्यता प्राप्त मदरसों की संख्या के बारे में जानकारी नहीं है। नेपाल सीमा के आस पास सघन जांच की जा रही है। यहां जो मदरसा अवैध तरीके से संचालित मिलेंगे उनके संचालकों पर कार्रवाई होगी।
– संजय मिश्रा, जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी

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News Source Amar Ujala

Boycott: बॉलीवुड में बायकॉट कल्चर हावी, बॉलीवुड अभिनेता गुटखा बेच रहे हैं

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एक्टर आमिर खान (Amir Khan) की ‘लाल सिंह चढ्ढा’, अक्षय कुमार (Akshay Kumar) की ‘रक्षाबंधन’ समेत कई बड़े स्टार्स की फिल्में बॉक्स ऑफिस पर औंधे मुंह गिरी हैं। 9 सितंबर को आलिया भट्ट (Alia Bhatt) और रणवीर कपूर (Ranveer Kapoor) की रिलीज हुई फिल्म ‘ब्रह्मास्त्र’ का भी बायकॉट किया जा रहा है। जिसके बाद बॉलीवुड में बायकॉट कल्चर हावी हो गया है।

16 सितंबर को डायरेक्टर-एक्टर प्रकाश झा (Prakash Jhaa) की फिल्म ‘मट्टो की साइकिल’ रिलीज हो रही है। हमने प्रकाश झा से बॉलीवुड के खिलाफ चल रहे बायकॉट ट्रेंड, वेब सीरीज ‘आश्रम’ पर उपजे विवाद समेत कई अन्य पहलुओं पर बातचीत की।पढ़िए पूरा इंटरव्यू…

सवाल: लगातार फिल्मों का बायकॉट किया जा रहा है। आपको कोई डर?

जवाब: फिल्मों का हमेशा से बायकॉट होता रहा है। एक ही फिल्म को कुछ लोग पसंद करते हैं, तो कुछ नहीं। अभी ब्रह्मास्त्र को बायकॉट किया जा रहा है, लेकिन देखिए कितनी जबरदस्त ओपनिंग हुई है। एडवांस में टिकट बुक हुए। मेरी भी कई फिल्मों का बायकॉट होता रहा है।

सवाल: इन दिनों बॉलीवुड स्टार्स की भी फिल्में लगातार फ्लॉप हो रही है। क्या कारण है?

जवाब: बॉलीवुड स्टार्स तो आजकल गुटखा बेच रहे हैं। उनको जब फुर्सत मिलती है, तब कोई रिमिक्स, वाहियात फिल्म बना लेते हैं। 5-6 फिल्मों के फ्लॉप होने के बाद भी इन्हें कोई फर्क नहीं पड़ रहा है। दरअसल, ये जवाबदेही फिल्म प्रोड्यूसर्स, कंटेंट राइटर्स और प्लेटफॉर्म (जिस मीडियम पर लोग फिल्में देखते हैं) की है।

विडंबना है कि इन्हें भी लगता है कि बड़े स्टार्स की बदौलत किसी भी फिल्म को हिट करा लेंगे, लेकिन दर्शक अच्छी स्टोरी, अपने बीच की कहानी देखना पसंद करते हैं। ये वाकई में दयनीय स्थिति है। इंडस्ट्री को अपने भीतर चिंतन करने की जरूरत है, नहीं तो जिस जनता ने इन्हें स्टार बनाया हैं, वही इन्हें डुबो देगी।

सवाल: तो क्या बॉलीवुड ने रियल कहानी दिखाना बंद कर दिया है?

जवाब: बिल्कुल, पिछले 6 महीने से जिस तरह की फिल्में आ रही हैं और दर्शक उसे बायकॉट कर रहे हैं, उससे तो यही लग रहा है। समझ में नहीं आ रहा है कि हिंदी फिल्म इंडस्ट्री किस तरह का कंटेंट तैयार कर रही है? वो क्या बना रही है, क्या सोच रही है? वो जमीन पर है या आसमान में, या बीच में कहीं लटके हुए हैं।

जो दर्शकों के सामने परोसा जा रहा है, वो कंटेंट है ही नहीं। डायरेक्टर पैसों और स्टार्स की बदौलत रिमिक्स कंटेंट से फिल्म बना रहे हैं। दरअसल, जो लोग फिल्म बना रहे हैं, उन्हें फिल्म बनाने का कोई पैशन ही नहीं है। कंटेंट नहीं है, तो फिल्म बनाना बंद कर देना चाहिए। OTT प्लेटफॉर्म पर भी आ रहा हिंदी का कंटेंट भी उसी तरह का है। पता नहीं, कैसे अप्रूव किया जा रहा है!

सवाल: साउथ इंडस्ट्री की फिल्में बॉलीवुड के मुकाबले हिट हो रही हैं। क्या वजहें हैं?

जवाब: रीजनल सिनेमा में ऐसा शुरू से रहा है। साउथ इंडस्ट्री लगातार एक्सपेरिमेंट कर रही है, जो बॉलीवुड में नहीं है। वो ऐसी कहानियां ला रहे हैं, जो दर्शकों को लुभाती हैं।

साउथ के अलावा पंजाबी, तेलुगू, तमिल, बंगाली जैसी रीजनल फिल्मों में भी ऐसा ही है। बॉलीवुड में जो अच्छी कहानियां कहने वाले डायरेक्टर, प्रोड्यूसर, राइटर हैं, उन्हें तो कोई पूछता ही नहीं है।

सवाल: डायरेक्टर एम गनी की ‘मट्टो की साइकिल’ पहली फिल्म है, जब आपके पास प्रपोजल आया तो कोई दुविधा?

जवाब: नहीं, कंटेंट और उनकी टीम को देखकर मैंने हामी भरी और जब एम गनी से बातचीत हुई, तो पता चला कि वो लंबे समय से थिएटर करते रहे हैं।

सवाल: मट्टो के किरदार के लिए खुद को तैयार करना कितना मुश्किल रहा?

जवाब: कहानी ब्रज में लिखी गई थी। ये मथुरा की कहानी है। शूटिंग मथुरा से सटे आयराखेड़ा गांव में हुई है। बतौर एक्टर किसी किरदार में घुसने का एक प्रोसेस होता है।

इसके लिए कई महीने मथुरा जाकर असली दिहाड़ी मजदूरों के बीच बैठता था। उनके हर काम को मैंने सीखा।

दरअसल, मैं एक्टिंग के कई वर्कशॉप, ट्रेनिंग करता रहता हूं ताकि बतौर डायरेक्टर भी एक्टर के साथ बातचीत करने का तरीका पता हो।

इस फिल्म के अलावा कुछ शॉर्ट फिल्में जल्द आएंगी, जिनमें मैंने एक्टिंग की है।

सवाल: दर्शकों को इस फिल्म में क्या देखने को मिलेगा?

जवाब: जब डायरेक्टर एम गनी ने मुझे स्क्रिप्ट भेजी थी, तो कुछ दिनों तक मेरे पास ये पड़ी रही। एक दिन उनका फोन आया कि आपने इसे पढ़ा या नहीं। मैंने स्क्रिप्ट पढ़ी, तो इसमें आधे हिंदुस्तान की कहानी दिखी। जो हर वक्त हमारे लिए घर, फ्लाइओवर, सड़क बनाता रहता है। सब्जियां बेचता है, सिक्योरिटी गार्ड का काम करता है, लेकिन इनके बारे में हम सोचते भी नहीं है। पास से गुजर जाए तो मुड़कर देखते भी नहीं हैं।

जब कोरोना की वजह से लगे लॉकडाउन के दौरान अचानक हजारों लोग सड़कों पर अपने घर के लिए निकल पड़ते हैं, तब हमें पता चलता है कि… अच्छा ये लोग भी थे।

साइकिल के इर्द-गिर्द एक मजदूर की जिंदगी कैसे अटकी रहती है। मट्टो की साइकिल इसी पर बेस्ड है। 20 साल पुरानी उसकी साइकिल हो गई है और बेटी 19 साल की हो चली है। यदि रोजाना समय से काम पर पहुंच जाएगा, तो उसे काम मिलेगा, दिहाड़ी मिलेगी, नहीं तो परिवार भूखा रहेगा। एक दिहाड़ी मजदूर की पूरी जद्दोजहद इस फिल्म में दिखती है।

सवाल: इसे OTT पर भी तो रिलीज किया जा सकता था?

जवाब: हां, शूटिंग कोरोना से पहले पूरी हो चुकी थी। कोरोना के दौरान इसे बुसान इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में भेजा गया था, जहां इसकी वर्चुअल स्क्रिनिंग हुई थी। दो साल तक सिनेमा हॉल बंद थे, तो हम इस फिल्म को रिलीज नहीं कर पाएं।

कंटेंट डिसाइड करने वालों को लगा कि ये OTT के लिहाज से बहुत ही ड्राई फिल्म है। लोग छोटे स्क्रीन पर इसे पसंद नहीं करेंगे।

तस्वीर में 'मट्टो की साइकिल' फिल्म के डायरेक्टर एम गनी और प्रोड्यूसर-डायरेक्टर, एक्टर प्रकाश झा हैं।
तस्वीर में ‘मट्टो की साइकिल’ फिल्म के डायरेक्टर एम गनी और प्रोड्यूसर-डायरेक्टर, एक्टर प्रकाश झा हैं।

सवाल: आपकी दूसरी फिल्म बतौर डायरेक्टर ‘दामुल’ और बतौर एक्टर ‘मट्टो की साइकिल’ में क्या समानताएं दिखती हैं?

जवाब: दोनों फिल्म में सिर्फ सब्जेक्ट अलग हैं। वो भी हमारे समाज से जुड़ा रियलिस्टिक सब्जेक्ट था, ये भी वही है। सिनेमैटिक लैंग्वेज में कहूं तो मट्टो थोड़ा रिच है, पुष्ट है। फिल्म ‘दामुल’ हार्ड हिटिंग और बहुत ही डार्क है।

सवाल: प्रकाश झा एक ‘स्टाइल ऑफ सिनेमा’ का नाम भी है। राजनीति, आरक्षण जैसी कोई फिल्म आ रही है?

जवाब: बिल्कुल, इस पर हम काम कर रहे हैं। अगले साल तक इस तरह की एक फिल्म के आने की उम्मीद है। इस साल ‘लाल बत्ती’ वेब सीरीज पर काम चल रहा है।

सवाल: क्या फिल्मों को हिट कराने के लिए विवाद खड़ा करना बॉलीवुड की नई स्ट्रैटजी है?

जवाब: मैं इन चीजों पर ध्यान नहीं देता हूं। अपने काम में लगा रहता हूं।

सवाल: ‘आश्रम’ वेब सीरीज को लेकर आरोप है कि आप एक धर्म को टारगेट कर रहे हैं?

जवाब: इसमें किसी भी धर्म का कहीं पर कोई जिक्र नहीं है। मुझे जहां कहानी मिलती है, अच्छी लगती है, बनाता हूं। जो बाबा बनकर दूसरों के साथ छल करते हैं, ये कहानी उनकी है। धर्म को मैं भी मानता हूं। मेरे लिए भी पूज्य है।

लोगों को यदि इस सीरीज से दिक्कत होती, तो सबसे ज्यादा देखी जाने वाली सीरीज नहीं होती। दरअसल, मैं कहानियां ढूंढता हूं। आज भी ये नहीं सोचता हूं कि राजनीतिक या सामाजिक मुद्दों पर ही फिल्में बनाऊंगा।

सवाल: ‘आश्रम’ के सीजन 4 के आने की भी बात चल रही है। क्रिटिक्स कह रहे हैं कि अब इसका कंटेंट बोझिल होता जा रहा है।

जवाब: दर्शकों के रिएक्शन पर मैं कुछ नहीं कह सकता हूं। सीजन 4 आ रहा है और उम्मीद है कि दर्शक इसे और अधिक पसंद करेंगे। आधी शूटिंग हो चुकी है। दरअसल, जब मुद्दे की बात होती है तो लोगों को थोड़ा भारी लगता ही है।

सवाल: ‘आश्रम’ सीजन 3 की शूटिंग के दौरान भोपाल में आप पर हमला हुआ था। FIR क्यों नहीं करवाई थी?

जवाब: FIR करवाने की नौबत नहीं आई। कुछ लोग बिना किसी बातचीत के लाठी-डंडे चलाने लगे थे। ये करीब एक-डेढ़ घंटे तक चलता रहा। स्थानीय पुलिस-प्रशासन ने कार्रवाई की। बात वहीं खत्म हो गई। उसके बाद एक महीने तक हमने भोपाल में शूटिंग की।

सवाल: राजनीति-2 भी आ रही है?

जवाब: देखिए, चर्चाएं तो होती ही रहती हैं। जब फिल्म आ जाएगी, या बनेगी तो हम खुद बताएंगे। अभी दो फिल्म और वेब सीरीज पर काम कर रहे हैं।

सवाल: आपने मनोज बाजपेयी को अपनी हर फिल्म में निगेटिव रोल में लिया है। क्या आपको उनमें हीरो नजर नहीं आता है?

जवाब: प्लान करके कुछ नहीं होता है। कहानी और कैरेक्टर के हिसाब से हम एक्टर चुनते हैं। मनोज बाजपेयी जानदार एक्टर हैं। मैं हमेशा कैरेक्टर देखता हूं। यदि निगेटिव कैरेक्टर नहीं हो, तो पॉजिटिव का क्या मतलब।

सवाल: बॉलीवुड में नेपोटिज्म को लेकर लगातार सवाल उठते हैं। क्या वाकई में ऐसा है?

जवाब: आपको ज्यादा पता होगा। ऐसा हो भी सकता है, लेकिन मैंने इस पर कोई रिसर्च नहीं की है। मेरे परिवार का भी कोई इंडस्ट्री में नहीं रहा है, लेकिन मैं काम कर रहा हूं।

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ज्ञानवापी: श्रृंगार गौरी पूजा पर सुनवाई जारी रहेगी, मुस्लिम पक्ष की आपत्तियां ख़ारिज, 22 सितंबर को इस मामले में अगली सुनवाई

Varanasi News: वाराणसी के ज्ञानवापी-श्रृंगार गौरी विवाद में आगे सुनवाई जारी रहेगी। वाराणसी जिला कोर्ट ने कहा कि यह केस सुनने लायक है। कोर्ट ने इस केस को न सुनने के लिए मुस्लिम पक्ष की तरफ से दर्ज आपत्तियों को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने माना कि यह केस 1991 के वर्शिप एक्ट के तहत नहीं आता। अब वाराणसी जिला कोर्ट 22 सितंबर को इस मामले में अगली सुनवाई करेगी। नीचे देखिए कोर्ट के आदेश की कॉपी…

वाराणसी जिला कोर्ट के जज एके विश्वेस का आदेश, जिसमें मामले की अगली सुनवाई 22 सितंबर को करने की बात कही गई है।
वाराणसी जिला कोर्ट के जज एके विश्वेस का आदेश, जिसमें मामले की अगली सुनवाई 22 सितंबर को करने की बात कही गई है।

कोर्ट के फैसले के दौरान हिंदू पक्ष के वकील हरिशंकर जैन और विष्णु शंकर जैन कोर्ट में मौजूद थे। हालांकि मुख्य याचिकाकर्ता राखी सिंह मौजूद नहीं थीं। जज ने कुल 62 लोगों को कोर्ट रूम में मौजूद रहने की इजाजत दी थी। इस मामले में 24 अगस्त को हिंदू और मुस्लिम पक्ष की बहस पूरी हो गई थी। इसके बाद वाराणसी के जिला जज एके विश्वेश ने 12 सितंबर यानी आज तक के लिए फैसला सुरक्षित रख लिया था।

शहर में हाई अलर्ट, धारा 144 लागू, फोर्स तैनात
वाराणसी के पुलिस आयुक्त ए सतीश गणेश ने फैसले से पहले बताया था, ‘शहर के संवेदनशील इलाकों में धारा 144 लागू है। शहर में हिंदू-मुस्लिमों की मिली-जुली आबादी वाले इलाके में पुलिस फोर्स तैनात है। पुलिस ने कुछ इलाकों में बीती रात से ही गश्त बढ़ा दी थी, ताकि आदेश के बाद कानून-व्यवस्था के हालात न बिगड़ें।’

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फैसले के मद्देनजर पूरे शहर को हाई अलर्ट पर रखा गया था। सोशल मीडिया की मॉनिटरिंग की जा रही थी। जिला अदालत परिसर में खास चौकसी बरतते हुए बम निरोधक दस्ता और डॉग स्क्वॉड भी तैनात किया गया था।

ज्ञानवापी-श्रृंगार गौरी से जुड़ा केस क्या है?
पांच हिंदू महिलाओं ने ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में मौजूद हिंदू देवी-देवताओं की पूजा की अनुमति मांगी थी। इन महिलाओं ने खासतौर पर श्रृंगार गौरी की हर दिन पूजा करने की इजाजत चाही थी। कोर्ट के आदेश पर मस्जिद में सर्वे भी किया गया था। सर्वे के बाद हिंदू पक्ष ने दावा किया था कि मस्जिद के तहखाने में शिवलिंग मौजूद है, जबकि मुस्लिम पक्ष ने इसे फव्वारा बताया था। केस में अब तक क्या हुआ, 3 पॉइंट्स में समझिए…

  • 18 अगस्त 2021 को 5 महिलाएं ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में मां श्रृंगार गौरी, गणेश जी, हनुमान जी समेत परिसर में मौजूद अन्य देवताओं की रोजाना पूजा की इजाजत मांगते हुए कोर्ट पहुंची थीं। अभी यहां साल में एक बार ही पूजा होती है।
  • इन पांच याचिकाकर्ताओं का नेतृत्व दिल्ली की राखी सिंह कर रही हैं, बाकी चार महिलाएं सीता साहू, मंजू व्यास, लक्ष्मी देवी और रेखा पाठक बनारस की हैं।
  • 26 अप्रैल 2022 को वाराणसी सिविल कोर्ट ने ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में श्रृंगार गौरी और अन्य देव विग्रहों के सत्यापन के लिए वीडियोग्राफी और सर्वे का आदेश दिया था।
वाराणसी में ज्ञानवापी मस्जिद काशी विश्वनाथ मंदिर के कैंपस में ही है, मस्जिद की एक दीवार किसी मंदिर के अवशेष की तरह नजर आती है।
वाराणसी में ज्ञानवापी मस्जिद काशी विश्वनाथ मंदिर के कैंपस में ही है, मस्जिद की एक दीवार किसी मंदिर के अवशेष की तरह नजर आती है।

हिंदुओं का तर्क: औरंगजेब ने मंदिर तोड़कर ज्ञानवापी मस्जिद बनवाई

  • मान्यता है कि 1669 में औरंगजेब ने काशी विश्वनाथ मंदिर का एक हिस्सा तोड़कर ज्ञानवापी मस्जिद बनवाई थी। कुछ इतिहासकार कहते हैं कि 14वीं सदी में जौनपुर के शर्की सुल्तान ने मंदिर को तुड़वाकर ज्ञानवापी मस्जिद बनवाई थी।
  • कुछ मान्यताओं के अनुसार अकबर ने 1585 में नए मजहब दीन-ए-इलाही के तहत विश्वनाथ मंदिर और ज्ञानवापी मस्जिद बनवाई थी।
  • मस्जिद और विश्वनाथ मंदिर के बीच 10 फीट गहरा कुआं है, जिसे ज्ञानवापी कहा जाता है। इसी कुएं के नाम पर मस्जिद का नाम पड़ा। स्कंद पुराण में कहा गया है कि भगवान शिव ने स्वयं लिंगाभिषेक के लिए अपने त्रिशूल से ये कुआं बनाया था।
  • शिवजी ने यहीं अपनी पत्नी पार्वती को ज्ञान दिया था, इसलिए इस जगह का नाम ज्ञानवापी या ज्ञान का कुआं पड़ा। किंवदंतियों, आम जनमानस की मान्यताओं में यह कुआं सीधे पौराणिक काल से जुड़ता है।

मुस्लिम पक्ष की दलील: यह वक्फ प्रॉपर्टी, नाम शाही मस्जिद आलमगीर

  • मसाजिद कमेटी की जवाबी बहस 22 अगस्त से लगातार जारी है। मुस्लिम पक्ष ने कहा कि वर्ष 1936 में वक्फ बोर्ड का गठन हुआ था। वर्ष 1944 के गजट में यह बात सामने आई थी कि ज्ञानवापी मस्जिद का नाम शाही मस्जिद आलमगीर है।
  • संपत्ति शहंशाह आलमगीर यानी औरंगजेब की थी। वक्फ करने वाले के तौर पर भी बादशाह आलमगीर का नाम दर्ज था। इस तरह से बादशाह औरंगजेब द्वारा 1400 साल पुराने शरई कानून के तहत वक्फ की गई (दान दी गई) संपत्ति पर वर्ष 1669 में मस्जिद बनी और तब से लेकर आज तक वहां नमाज पढ़ी जा रही है।
  • इसके अलावा 1883-84 में अंग्रेजों के शासनकाल में जब बंदोबस्त लागू हुआ तो सर्वे हुआ और आराजी नंबर बनाया गया। आराजी नंबर 9130 में उस समय भी दिखाया गया था कि वहां मस्जिद है, कब्र है, कब्रिस्तान है, मजार है, कुआं है। पुराने मुकदमों में भी यह तय हो चुका है कि ज्ञानवापी मस्जिद वक्फ की प्रॉपर्टी है।
  • सरकार भी इसे वक्फ प्रॉपर्टी मानती है, इसी वजह से काशी विश्वनाथ एक्ट में मस्जिद को नहीं लिया गया। वर्ष 2021 में मस्जिद और मंदिर प्रबंधन के बीच जमीन की अदला-बदली हुई, वह भी वक्फ प्रॉपर्टी मान कर ही की गई। इसलिए मां श्रृंगार गौरी का मुकदमा सिविल कोर्ट में सुनवाई योग्य नहीं है।

विश्वनाथ मंदिर से सटी मस्जिद को लेकर 213 साल पहले हुए दंगे, 1991 में कोर्ट केस

हिंदू पक्ष का मानना है कि औरंगजेब ने 1699 में काशी विश्वनाथ मंदिर को तोड़कर ज्ञानवापी मस्जिद का निर्माण कराया था। यह मामला 1991 से अदालत में चल रहा है।
हिंदू पक्ष का मानना है कि औरंगजेब ने 1699 में काशी विश्वनाथ मंदिर को तोड़कर ज्ञानवापी मस्जिद का निर्माण कराया था। यह मामला 1991 से अदालत में चल रहा है।

वाराणसी के प्रसिद्ध काशी विश्वनाथ मंदिर में बनी ज्ञानवापी मस्जिद को लेकर जारी विवाद वर्षों पुराना है। इन मंदिर-मस्जिद को लेकर 213 साल पहले दंगे भी हो चुके हैं। हालांकि आजादी के बाद इस मुद्दे को लेकर कोई दंगा नहीं हुआ। ज्ञानवापी को हटाकर उसकी जमीन काशी विश्वनाथ मंदिर को सौंपने को लेकर दायर पहली याचिका अयोध्या में राम मंदिर मुद्दा उठने के बाद 1991 में दाखिल हुई थी।

ज्ञानवापी में शिवलिंग के दावे के बावजूद हिंदू पक्ष का केस हो सकता है खारिज, जानिए कैसे

यह ज्ञानवापी के पिछले हिस्से की तस्वीर है, इसको लेकर हिंदू पक्ष दावा करता है कि यह मंदिर का अवशेष है, इसलिए इस पर उनका अधिकार है।
यह ज्ञानवापी के पिछले हिस्से की तस्वीर है, इसको लेकर हिंदू पक्ष दावा करता है कि यह मंदिर का अवशेष है, इसलिए इस पर उनका अधिकार है।

वाराणसी के ज्ञानवापी मस्जिद विवाद में हिंदू पक्ष का दावा खारिज हो सकता है। अंजुमन इंतेजामिया प्रबंध समिति ने सुप्रीम कोर्ट में एक अपील दायर करके कहा है कि ज्ञानवापी परिसर का सर्वे कराने वाला वाराणसी सिविल कोर्ट का आदेश स्पष्ट रूप से द प्लेसेज ऑफ वर्शिप (स्पेशल प्रोविजंस) एक्ट 1991 का उल्लंघन है। इसके बाद ज्ञानवापी विवाद की पूरी बहस इसी कानून के इर्द-गिर्द टिकी हुई है।

ये तो कबूतर जैसे आंखें मूंदना हुआ कि बिल्ली है ही नहीं’, वर्शिप बिल पर संसद में तीखी बहस

यह काशी विश्वनाथ मंदिर और उस कैंपस में मौजूद ज्ञानवापी मस्जिद का एरियल व्यू है, इससे साफ होता है कि दोनों के स्ट्रक्चर बेहद नजदीक हैं।
यह काशी विश्वनाथ मंदिर और उस कैंपस में मौजूद ज्ञानवापी मस्जिद का एरियल व्यू है, इससे साफ होता है कि दोनों के स्ट्रक्चर बेहद नजदीक हैं।

‘मैंने बचपन में एक बात सुनी थी। कबूतर जब बिल्ली को देखता है तो वह जानता है कि बिल्ली उसे खा जाएगी। बिल्ली को कबूतर बहुत स्वादिष्ट लगता है। कबूतर इतना भोला और नादान होता है कि वह सोचता है कि आंखें बंद कर लूंगा तो बिल्ली दिखेगी नहीं। इस तरह से बिल्ली उसको खा जाती है। 1947 की स्थिति में धार्मिक स्थलों को बनाए रखना, यानी कबूतर की तरह बिल्ली से आंखें मूंदना है।’ 9 सितंबर 1991 को लोकसभा में द प्लेसेज ऑफ वर्शिप बिल (उपासना स्थल विधेयक) पर बहस के दौरान यह बात भाजपा नेता उमा भारती ने कही थी।

ज्ञानवापी, ताजमहल और मथुरा ही नहीं, 5 राज्यों की 10 मस्जिदों को लेकर भी विवाद

मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि परिसर में स्थित शाही ईदगाह मस्जिद का भी ज्ञानवापी की तर्ज पर सर्वे कराने के लिए याचिका दाखिल की गई है।

वाराणसी स्थित ज्ञानवापी मस्जिद का विवाद अभी थमा भी नहीं था कि अब मथुरा में श्री कृष्ण जन्म भूमि के परिसर में स्थित मस्जिद के भी सर्वे कराए जाने की याचिका अदालत पहुंच गई है। उधर ताजमहल के भी शिव मंदिर तेजो महालया होने के दावे को लेकर याचिका दायर की गई है। इस बीच हिंदू संगठनों के कुछ कार्यकर्ताओं ने दिल्ली में कुतुब मीनार के पास हनुमान चालीसा का पाठ करते हुए इसका नाम बदलकर विष्णु स्तंभ किए जाने की मांग की। हालांकि, भारत में मंदिर-मस्जिद से जुड़ा विवाद नया नहीं है। इसमें सबसे ज्यादा चर्चा राम मंदिर-बाबरी मस्जिद विवाद की हुई, जो 2019 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद थम गया।

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Hyderabad News: हैदराबाद के एक होटल में लगी भीषण आग, 8 की मौत

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Hyderabad News: हैदराबाद के होटल में आग लग गई जिसके बाद पूरे इलाके में अफरातफरी मच गयी। बताया जा रहा है की जब होटल में आग लगी उस वक़्त होटल में तकरीबन 25 लोग थे। होटल में आग लगने से 8 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है।

हैदराबाद के होटल में सोमवार रात 10 बजे आग लग गई। हादसे में 8 लोगों की मौत हो गई है। हैदराबाद कमिश्नर सीवी आनंद ने न्यूज एजेंसी एएनआई (News Agency ANI) को बताया कि फायर ब्रिगेड (Fire Brigade) वक्त पर पहुंच गई थी। रेस्क्यू ऑपरेशन (rescue operation) तेजी से चलाया गया, लेकिन धुआं काफी ज्यादा था और इस वजह से कुछ लोगों की जान चली गई।

पुलिस ने बताया कि होटल के ग्राउंड फ्लोर पर इलेक्ट्रॉनिक स्कूटर रीचार्ज यूनिट थी। आग यहीं से फैली। आग ने पहली और दूसरी मंजिल को अपनी चपेट में ले लिया। धुआं काफी ज्यादा भर गया था और दम घुटने से लोगों की जान चली गई।

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रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना के वक्त इमारत में 25 लोग थे। मौके पर मौजूद कई लोगों ने होटल में फंसे लोगों का रेस्क्यू किया और उन्हें अस्पताल पहुंचाया। कुछ लोग जान बचाने के लिए खिड़कियों से भी कूद गए।

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द्वारकापीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के निधन के बाद अगला उत्तराधिकारी कौन बनेगा?

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MP News: द्वारकापीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती (Shankaracharya Swami Swaroopanand Saraswati) का निधन रविवार को दोपहर में हो गया है. वह 99 वर्ष के थे. उन्हें आज मध्य प्रदेश (MP) के नरसिंहपुर (Narsinghpur) में स्थित परमहंसी गंगा आश्रम में समाधि दी जानी है. उनके निधन के बाद अब उनके उत्तराधिकारी को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं. सोमवार को ही उनके उत्तराधिकारी की घोषणा की जानी है. लेकिन इस बात की चर्चा तेज हो गई है कि उनका उत्तराधिकारी कौन बनेगा?

शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के उत्तराधिकारी की घोषणा के बाद संत समाज द्वारका पीठ और ज्योतिष पीठ पर फैसला लेगा. इस बीच कहा जा रहा है कि दंडी स्वामी सदानंद सरस्वती जी महाराज को द्वारका शारदा पीठ की कमान मिल सकती है. वहीं दूसरी ओर दंडी स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज को ज्योतिषपीठ की कमान सौंपी जा सकती है. ये दोनों ही शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के प्रमुख शिष्य माने जाते हैं.

वहीं शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के अंतिम दर्शन के लिए राजनीतिक दलों के नेता भी सोमवार को पहुंचेंगे. पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ सुबह करीब 11 बजे आश्रम पहुंचकर उनके अंतिम दर्शन करेंगे. वहीं केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद पटेल दोपहर 2 बजे झोतेश्वर स्थित परमहंसी आश्रम पहुंच सकते हैं. पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश पचौरी और छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह के भी पहुंचने की संभावना जताई जा रही है.

99 साल की उम्र में आया हार्ट अटैक

आश्रम के अनुसार स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती गुजरात स्थित द्वारका-शारदा पीठ एवं उत्तराखंड स्थित ज्योतिश पीठ के शंकराचार्य थे और पिछले एक साल से अधिक समय से बीमार चल रहे थे. शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी महाराज 99 वर्ष की आयु में हृदय गति के रुक जाने से ब्रह्मलीन हुए. उन्होंने अपनी तपोस्थली परमहंसी गंगा आश्रम झोतेश्वर में दोपहर 3.21 बजे अंतिम सांस ली.

Shankaracharya

दंडी स्वामी सदानंद सरस्वती जी महाराज और दंडी स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज को मिल सकती है कमान.

गोरक्षा से लेकर देश की आजादी तक दिया योगदान

शंकराचार्य ने सनातन धर्म, देश और समाज के लिए अतुल्य योगदान किया. उनसे करोड़ों भक्तों की आस्था जुडी हुई है. इसमें कहा गया है कि वह स्वतन्त्रता सेनानी, रामसेतु रक्षक, गंगा को राष्ट्रीय नदी घोषित करवाने वाले तथा रामजन्मभूमि के लिए लम्बा संघर्ष करने वाले, गौरक्षा आंदोलन के प्रथम सत्याग्रही एवं रामराज्य परिषद् के प्रथम अध्यक्ष थे और पाखंडवाद के प्रबल विरोधी थे.

आज दी जाएगी भू समाधि

इसी बीच, आश्रम के सूत्रों ने बताया, उन्हें नरसिंहपुर के गोटेगांव स्थित उनकी तपोस्थली परमहंसी गंगा आश्रम झोतेश्वर में सोमवार दोपहर करीब 3-4 बजे भू समाधि दी जाएगी. उन्होंने कहा कि वह डायलिसिस पर थे और पिछले कुछ महीनों से आश्रम में अक्सर वेंटिलेटर पर रखे जाते थे, जहां उनके इलाज के लिए एक विशेष सुविधा बनाई गई थी. इसके अलावा, वह मधुमेह से पीड़ित थे और वृद्धावस्था संबंधी समस्याओं से भी जूझ रहे थे. (इनपुट एजेंसी से भी)

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